Bappi lahiri की जीवनी (biography)

Bappi lahiri जिन्हें लोग प्यार से बप्पी दादा कहते थे। एक महान गायक होने के साथ-साथ महान संगीतकार भी थे।इन्होने 15 तारीख के मंगलवार की रात मे करीब 11:40 – 11:45 pm को मुंबई के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। यह वह क्षण था जब पूरा बॉलीवुड और काॅलीवुड फिल्मी जगत में शोक की लहर फैल गई। बालीवुड को डिस्को बीट से पहली बार परिचय बप्पा दान ने ही करवायी थी इसलिए वह बॉलीवुड और पूरे भारत में डिस्को किंग के नाम से मशहूर व प्रसिद्ध थे।

Bappi lahiri का प्रारंभिक जीवन

बप्पी दादा का जन्म 27 नवंबर 1952 को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। इनका जन्म एक हिंदू बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था।इनके पिता का नाम अपरेश लाहिड़ी था जो एक प्रसिद्ध बंगाली गायक थे। इनके माँ का नाम बंसारी लाहिरी था यह भी एक गायिका होने के साथ-साथ संगीतकार भी थीं।बप्पी दा अपने माता-पिता की इकलौते संतान थे ।बप्पी दा को बचपन से ही संगीत में बहुत रुचि थी।इस रूचि को उनकी मां ने पहचाना और मात्र 3 साल की आयु से ही उन्हें शास्त्रीय संगीत और श्यामा संगीत की शिक्षा देना आरम्भ कर दिया। बप्पी दा ने मात्र 3 साल की आयु में ही तबला बजाना आरंभ कर दिया और कुछ वर्षो के अंतराल में पियानो,गिटार, ड्रम,बोंगो, ढोलक और सैक्सोफोन जैसे अन्य संगीत वाद्ययंत्र भी सीख लिये।

Bappi lahiri का वैवाहिक जीवन

बप्पी दा ने 24 जनवरी 1977 को चित्रानी लाहिड़ी से शादी की।बप्पी दा के दो बच्चे हैं एक बेटी रेमा लाहिरी जो अपने पिता की तरह ही पेशे से एक गायिका हैं।और एक बेटा है बप्पा लाहिरी जो पेशे से एक संगीत निर्देशक हैं।

Bappi lahiri की ख्वाहिश

Bappi lahiri की यह ख्वाहिश थी कि वह एक गायक और संगीतकार के तौर पर न केवल भारत देश में बल्कि पूरे विश्व भर में जाने जाये।यह इच्छा उनकी तब  से थी जब से उनकी रूचि संगीत मे हुई।

Bappi lahiri एक नजर में 

  • नाम – आलोकेश बप्पी लहरी
  • निक नेम – बप्पी दा, 
  • प्रसिद्ध नाम – डिस्को किंग
  • जन्मदिन – 27 नवंबर 1952
  • जन्म स्थान – जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल
  • उम्र – 69 साल (साल 2022 तक )
  • मृत्यु की तारीख – 15 फरवरी 2022
  • मृत्यु का स्थान – मुंबई के एक निजी अस्पताल में 
  • राशि – धनु
  • नागरिकता – भारतीय
  • धर्म – हिन्दू 
  • लम्बाई – 5 फीट 4 इंच
  • वजन – 80 किग्रा
  • आँखों का रंग – भूरा
  • बालो का रंग – काला
  • पेशा – संगीतकार और गायक
  • वैवाहिक स्थिति – विवाहित

Bappi lahiri का कैरियर

बप्पी दा ने 1970,1980 और 1990 के दशक में बॉलीवुड और भारत के लोगो के दिल पर राज किया।बप्पी दा को इलेक्ट्रॉनिक डिस्को बीट की बहुत अच्छी समझ थी ।भारत में डिस्को बीट को लाने वाले यह सबसे पहले भारतीय थे।इसलिए बप्पी दा को सब डिस्को किंग भी कहते थे।

बप्पी दा ने 19 वर्ष की उम्र से ही संगीत निर्देशक के रूप में अपना कैरियर शुरू किया।

उन्होंने संगीतकार के रूप में शुरुआत सबसे पहले बंगाली फिल्म ‘दादु’ (1974) से की। संगीतकार और गीतकार के रूप में इनकी पहली हिंदी फिल्म ‘नन्हा शिकारी’ (1973) थी। लेकिन यह बॉलीवुड फिल्म ‘ज़ख्मी’ (1975) से पहचानें गये।

उसके बाद इन्होंने एक से एक सुपर हिट गाने फिल्मो में दिया जिसमें ‘चलते चलते’ (1976), ‘डिस्को डांसर’ (1982), ‘नमक हलाल’ (1982), ‘शराबी’ (1984), ‘धर्म कर्म’ जैसी विभिन्न हिंदी फिल्में है।‘डिस्को डांसर’ फिल्म(1982), से ‘आई एम ए डिस्को डांसर’‘नमक हलाल’ फिल्म(1982) और ‘शराबी’फिल्म के गानो को आज तक सुना जाता है।

बप्पी दा ने बंगाली और हिंदी फिल्मो मे  संगीतकार और गीतकार के अलावा तेलुगू, तमिल, कन्नड़,उड़िया और मलयालम जैसी प्रांतीय क्षेत्र की भाषाओ में भी काम किया। इन्होंने लगभग 5000 से अधिक गाने गाये और फिल्मो मे संगीत दिया।

इनकी कुछ सुपर हिट काम विभिन्न क्षेत्र से इस प्रकार से है

कन्नड़- ‘कृष्णा नी बेगने बरो’ (1986), ‘अफ्रीकादल्ली शीला’ (1986),‘पुलिस मथु दादा’ (1991), और ‘गुरु’ (1989)।

तेलुगु- ‘सिंहासनम’ (1986),‘राउडी इंस्पेक्टर’ (1992), ‘स्टेट राउडी’ (1989), और ‘पुण्य भूमि ना’ (1995)

तमिल- ‘अपूर्व सहोदरीगल’ (1983),‘किज़हक्कू अफ़्रीकाविल शीला’ (1987) ‘पदुम वानमपदी’ (1985)। इस के अतिरिक्त इन्होने डबिंग के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया जैसे इन्होंने एनिमेटेड फिल्म, ‘मोआना’ (2016) के लिए हिंदी- डबिंग में ‘तमातो’ के चरित्र को डब किया । एक डबिंग कलाकार के तौर पर इन्होंने ‘किंग्समैन 2: द गोल्डन सर्कल’ (2017)  फिल्म मे अपना योगदान दिया।।इसमें इन्होंने एल्टन जॉन के किरदार को हिंदी में डब किया था।

बप्पी दा का सोने (gold)से प्यार

बप्पी दा को सोने (gold)से  बहुत प्यार था।इसलिए उन्हे लोग “गोल्डमैन ” के नाम से भी जानते थे। एक इंटरव्यू के दौरान बप्पी दा ने बताया था वह सोना शो ऑफ करने के लिए नही पहनते है वह सोना दो कारणो से पहनते है एक तो सोना मेरे लिए बहुत लकी है और दूसरा में अमेरिकी पॉप स्टार एल्विस प्रेस्ली से बहुत इंस्पायर हूँ। जिस तरह से एल्विस अपने कॉन्सर्ट में सोने की कई सारी चेन पहनता है और विश्व भर में विख्यात है शायद अगर में भी सोना पहनू तो अंतराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हो जाऊँ।

माना जा रहा है कि बप्पी दा के पास करीबन साढ़े 700 ग्राम सोना और करीब 5 किलो चांदी है।

बप्पी दा से जुड़े कुछ रोचक बातें

  • बप्पी दा ने एक साल में 33 फिल्में करने का एक संगीतकार और गायक के रूप में गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
  • इनके पास 1983 से 1985 तक सभी 12 सुपरहिट सिल्वर जुबली फिल्मों में संगीत बनाने और देने का रिकॉर्ड है।
  • वह पहले ऐसे भारतीय है जिन्होने 1996 में,माइकल जैक्सन से पहले लाइव शो में मिले  माइकल जैक्सन विश्व प्रसिद्ध गायक और नर्तक थे।
  • इसके अलावा 2006 में ज़ी टीवी पर लोकप्रिय गायन रियलिटी शो “सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स”, 2007 में “सा रे गा मा पा चैलेंज” और सोनी टीवी पर “के फॉर किशोर” में जज भी रहें
  • बप्पी दा ने इंडियन प्रीमियर लीग में शाहरुख खान की “कोलकाता नाइट राइडर्स” की टीम के लिए 2008 में अपना संगीत दिया।
  • बप्पी दा हाल ही मे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। इन्होंने श्रीरामपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था।
  • 2018 में बप्पी दा ने 63 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • बप्पी दा सोने के बहुत शौकीन थे और धूप का चश्मा पहनना पसंद करते हैं। वह मजाक में गाते भी थे ‘सोना मेरा भगवान है।

बप्पी दा की संपत्ति

बप्पी दा की कुल संपत्ति लगभग $3 मिलियन है मतलब लगभग 22 करोड़ रूपए की कुल संपत्ति के मालिक थे बप्पी दा।बप्पी दा  8 से 10 लाख रूपये प्रति गीत लेते थे।

बप्पी दा को श्रद्धांजलि

बप्पी दा को भारत में डिस्को बीट लाने का सारा श्रेय जाता है।उनके जीवंत,लयबद्ध और ताजा नये गीत और संगीत ने कई दशको तक संगीत प्रेमियो को अपने गीत पर थिरकने को मजबूर कर देता है। इसलिए इन्हें संगीत प्रेमियो ने इन्हें डिस्को किंग के नाम से पुकारने लगा।

ऐसे व्यक्तित्व और प्रतिभाशाली व्यक्ति को हमारे और हमारी टीम की तरफ से भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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